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इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में सफलता के ज्योतिषीय योग Astrological yoga of success in engineering and technical fields  


Neeraj Goel
(@neeraj-goel)
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वैदिक ज्योतिष में मंगल और शनि से इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र के बारे में विचार किया जाता है। शनि को लौह से जुड़े पदार्थों, मशीनों, औजारों, उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। और मंगल विद्युत का कारक होकर मशीनों को संचालित करने का कार्य करता है तो वहीँ निर्माण कार्यों की तकनीक भी मंगल ग्रह को ही माना गया है, शनि और मंगल ही तकनीकी कार्यों और टेक्नोलॉजी में अपनी विशेष भूमिका निभाते हैं और व्यक्ति को तकनीकी समझ और तकनीकी कार्यों में रुचि पैदा करते हैं अतः निष्कर्षतः शनि और मंगल की अच्छी स्थिति ही व्यक्ति को इंजीनियरिंग के क्षेत्र से जोड़ती है अतः कुंडली में यदि शनि और मंगल बलि और शुभ स्थिति में हों या करियर को प्रभावित कर रहे हों तो व्यक्ति को तकनीकी कार्यों और इंजीनियरिंग में सफलता मिलती है। इसमें भी विशेष रूप से शनि मेकैनिकल इंजीनियरिंग और गाड़ियों, वाहनों और मशीनों से जुड़े कार्यों में सफलता देता है तो मंगल इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिविल इंजीनियरिंग, विद्युत् क्षेत्र और निर्माण कला से जुड़े तकनीकी क्षेत्र में सफलता देता है शनि और मंगल में से तुलनात्मक दृष्टि से जो अधिक बलवान और शुभ स्थिति में हो उससे सम्बंधित क्षेत्र ही श्रेष्ठ और सफलतादायक होता है। इसके अलावा वायुतत्व राशियों (मिथुन,तुला,कुम्भ) का दशम भाव (करियर का भाव) लग्न और पंचम भाव में होना भी बुद्धिपरक और गहन अध्ययन वाले कार्यों में सहायक होता है तथा कुंडली में बुद्धिकारक बुध ज्ञान कारक बृहस्पति और पंचम भाव का बलि होना अच्छी शिक्षा और बौद्धिक क्षमता देकर इंजीनियरिंग की सफलता में अपनी सहायक भूमिका निभाते हैं। कुंडली में शनि और मंगल का पीड़ित होना इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बाधक बनता है और व्यक्ति को प्रयास करने पर भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाती।

इंजीनियरिंग बनने के कुछ खास योग –

जन्मकुंडली में मंगल और शनि की स्थिति के साथ दशम और एकादश भाव का अध्ययन करना भी जरूरी है। क्योंकि दशम भाव आजीविका का स्थान है और एकादश आय स्थान होता है। इन दोनों घरों में बुध और बृहस्पति जैसे शुभ ग्रहों की उपस्थिति के साथ शनि-मंगल का शुभ योग हो तो जातक विशेष सफलता अर्जित करता है।

मंगल इलेक्ट्रॉनिक्स का कारक है शनि मशीनों का कारक है तथा बुध कम्प्यूटर फील्ड का कारक है अतः इन तीनो ग्रहों का संयुक्त रूप से बली होना कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी में सफलता देता है।

यदि कुंडली में शनि स्व उच्च राशि (मकर,कुम्भ,तुला) में होकर शुभ भाव में हो तो इंजीनियरिंग और तकनीकी कार्यों में सफलता देता है।

दशम स्थान का बलवान शनि जातक को एक सफल इंजीनियर तो बनाता ही है, ऐसा व्यक्ति विदेशों से धन अर्जित भी करता है।

दशम भाव में बलवान मंगल की उपस्थिति भी इस फील्ड में सफलता दिलाता है। मंगल का स्व राशि मेष, वृश्चिक में होना और शुभ ग्रहों की दृष्टि होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, बिल्डिंग निर्माण क्षेत्रों के लिए शुभ होता है।

कुंडली में शनि की प्रधानता होने पर व्यक्ति मेकैनिकल, वाहन और मशीनों से जुड़े तकनीकी कार्यों में आगे बढ़ता है तथा मंगल की प्रधानता सिविल इंजीनियरिंग, निर्माण कार्य, और इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में सफलता देता है।

लग्नस्थ बुध पर मंगल या शनि की दृष्टि हो तथा बृहस्पति द्वितीय भाव में स्थित हो अथवा इन तीनों ग्रहों का किसी भी रूप में शुभ संबंध बन रहा हो तो जातक कंप्यूटर इंजीनियर होता है|

शनि यदि चतुर्थ भाव में हो तो दशम भाव पर दृष्टि होने से भी टेक्नीकल फील्ड में सफलता मिलती है।

मंगल का स्व उच्च राशि (मेष,वृश्चिक मकर) में शुभ स्थान में होना भी इंजीनियरिंग में सफलता देता है।

दशम भाव पर शनि की दृष्टि हो, बुध शनि की राशि में, या शनि बुध की युति या बुध पर शनि की दृष्टि का प्रभाव हो तो जातक को कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में अच्छी सफलता प्राप्त होती है।

कुंडली में शुभ भावों में शनि और मंगल का योग होना भी व्यक्ति को इंजीनियरिंग और तकनीकी कार्यों से जोड़ता है।

शनि से त्रिकोण में मंगल यदि शुभ और बली स्थिति में हो तो यह भी व्यक्ति को इंजीनियरिंग के क्षेत्र से जोड़ता है।

मंगल यदि बली होकर दशम भाव में हो तो इंजीनियरिंग में सफलता मिलती है।

बली स्थिति में स्थित मंगल की दशम भाव पर दृष्टि पड़ना भी इंजीनियरिंग के क्षेत्र से जोड़ता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से शनि और मंगल इंजीनियरिंग और तकनीकी कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस क्षेत्र में किस व्यक्ति को किस स्तर की सफलता मिलेगी, यह उसकी व्यक्तिगक कुंडली के बल पर निर्भर करता है पर यहाँ एक विशेष बात यह भी है कि शनि और मंगल का बली होना व्यक्ति में तकनीकी कार्यों के प्रति रुचि और प्रतिभा तो देता है परंतु अच्छी शिक्षा और बौद्धिक क्षमता के बिना इस क्षेत्र में आगे बढ़ना संभव नहीं होता अतः कुंडली में पंचम भाव, पंचमेश, बुध और बृहस्पति जितनी अच्छी स्थिति में होंगे उतनी ही अच्छी प्रतिभा और सफलता व्यक्ति को देंगे यदि ये उपरोक्त घटक कुंडली में पीड़ित या कमजोर होने से व्यक्ति अच्छी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता है, और ऐसे में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ना भी संभव नहीं हो पाता इसलिए शिक्षा के इन घटकों का बली होना भी बहुत आवश्यक है, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि और मंगल तो बहुत बलवान हों परंतु शिक्षा के ग्रह कमजोर होने से उसकी शिक्षा पूरी न हो पाए तो ऐसा व्यक्ति तकनीकी कार्यों से जुड़कर मिस्त्री या तकनीकी कारीगर के रूप में अपनी आजीविका चलाता है।


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