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मंगल दोष और उसका परिहार Mangal Dosh and Remedy  


Neeraj Goel
(@neeraj-goel)
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मंगल ग्रह कुंडली के दूसरे , चौथे, सातवें, आठवें, और बारहवें भाव में स्थित हो तो जातक की कुण्डली में मंगल दोष होता है । दूसरा , चौथा , सातवां , आठवां , और बारहवां भाव क्रमशः परिवार, सुख, पति/पत्नी, आयु और शयन सुख का होता है । इन भावों में स्थित मंगल उपरोक्त सुखों में कमी दर्शाता है अर्थात वैवाहिक संबंधों में बुरा प्रभाव डालता है । मंगल दोष को लगन, चन्द्र और शुक्र ग्रह तीनों से देखना चाहिए । ये मंगल दोष लगभग 7 5 % कुंडलियों में होता है तो ये सभी मांगलिक नहीं होते । हमारे शास्त्रों ने कुछ ऐसे योग भी बताये हैं जिनके प्रभाव से मंगल दोष ख़त्म हो जाता है या उसका परिहार हो जाता है जो इस प्रकार हैं :-

जातक का जन्म लगन कर्क या सिंह है तो मंगल किसी भी भाव में स्थित हो मंगल दोष नहीं होता

मंगल दूसरे भाव में मिथुन या कन्या राशी में हो

मंगल चौथे भाव में मेष या वृश्चिक राशी में हो

मंगल सप्तम भाव में कर्क या मकर में हो

मंगल अष्टम भाव में धनु या मीन में हो

मंगल बारहवें भाव में वृष या तुला राशी में हो

मंगल कुम्भ या सिंह राशी में हो

मंगल जिस राशी में हो उसका स्वामी केंद्र या त्रिकोण में हो

मंगल मित्र राशी में हो

मंगल सूर्य या गुरु के साथ हो या दृष्ट हो

उपरोक्त योगों में से कोई भी योग अगर कुंडली में है तो जातक मांगलिक नहीं है और उसका विवाह गैर-मांगलिक कन्या से भी हो सकता है ।


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