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महाभाग्य योग Mahabhagya yoga  


Neeraj Goel
(@neeraj-goel)
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ज्योतिष में योगों का बड़ा ही महत्व है। महाभाग्य योग जातक की कुंडली में स्थित विविध शुभ योगों के कारण जातक को समाज में मान, सम्मान प्रतिष्ठा एवं प्रसिद्ध की प्राप्ति होती है।

शुभ ग्रहों की युति एवं प्रति युति जातक के भाग्य को बलवान बनाकर जातक की कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण करती है।

सभी प्रकार के योगों में स्त्री एवं पुरुष जातक दोनों जातक की कुंडली में एक समान शुभ ग्रहों कि युति एवम् प्रति युति से कुंडली में योग का निर्माण होता है।

महाभाग्य योग एक ऐसा योग है जिसमें पुरुष एवं स्त्री दोनों की कुंडली में विपरीत नियम पाए जाते हैं।

जन्म लग्न कुंडली में महा भाग्य योग जन्म लग्न, चंद्र और सूर्य की विशेष राशियों में स्थिति के आधार पर तथा पुरुष एवं स्त्री के दिन और रात्रि के जन्म समय के आधार पर पुरुष और स्त्रियों के लिए अलग-अलग तरीके से देखा जाता है। ज्योतिष में इस योग को एक विशेष योग माना गया है। स्त्री तथा पुरुष के लिए अलग-अलग नियम इस योग में देखने को मिलते हैं। ऐसा योग है जिसमें जन्म लेने वाला जातक और साधारण प्रतिभाओं का स्वामी होता है। जातक को हर प्रकार की सुख वैभव समृद्धि और प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है।
पुरुष जातक की कुंडली में महाभाग्य योग।

जिस पुरुष जातक का जन्म लग्न, चंद्र और सूर्य विषम राशि यानी कि मेष राशि ,मिथुन राशि, सिंह राशि ,तुला राशि, धन राशि एवं कुंभ राशि में स्थित हो उस जातक की कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जातक का जन्म लग्न मेष राशि, मिथुन राशि, सिंह राशि, तुला राशि, धन राशि एवं कुंभ राशि का होना चाहिए। जन्म लग्न कुंडली के चंद्र और सूर्य ग्रह भी विषम राशि में ही स्थित होने चाहिए।
जातक का जन्म सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच यानी के दिन का होना चाहिए।

विषम लग्न हो विषम राशि में चंद्रमां और सूर्य ग्रह विषम राशि में हो और दिन में जन्म लेने वाले जातक की कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण होता है।

पुरुष की कुंडली में दिन में जन्म हो, लग्न सूर्य तथा चंद्र भी विषम राशि में अर्थात पुरुष राशि में स्थित होने के कारण कुंडली में पुरुष तत्व की प्रधानता बढ़ जाती है। तथा सूर्य भी प्रबल हो जाता है जिसके कारण पुरुषत्व प्रधानता अत्यंत बढ़ जाने के कारण पुरुष जातक को अत्यंत लाभ प्राप्त होता है।

स्त्री जातक की कुंडली में महाभाग्य योग।

स्त्री का जन्म लग्न ,चंद्र और सूर्य सम राशि यानी की वृषभ राशि, कर्क राशि, कन्या राशि ,वृश्चिक राशि ,मकर राशि और मीन राशि में स्थित हो तो स्त्री जातक की कुंडली में महाभाग्य योग बनता है।

स्त्री जातक का जन्म रात्रि में हो लग्न सम राशि का सूर्य तथा चंद्र सम राशि में स्थित हो अर्थात स्त्री राशि में स्थित हो तो कुंडली में चंद्र एवं स्त्री तत्व का प्रभाव बढ़ जाता है जिसके कारण स्त्री जातक को लाभ प्राप्त होता है।

सूर्य पुरुष ग्रह है जो दिन को बलवान होता है और चंद्रमा स्त्री ग्रह है जो रात्रि को बलवान होता है जिसके कारण पुरुष और स्त्री दोनों की कुंडली में विपरीत नियमों के अनुसार महाभाग्य योग का निर्माण होता है।

महाभाग्य योग के लाभ।

कुंडली में स्थित महाभाग्य योग एक ऐसा राजयोग है जिसके कारण जातक को मान, सम्मान, पद प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है।

महाभाग्य योग का शुभ फल प्राप्त होने हेतु जातक की कुंडली में सूर्य एवं चंद्र का शुभ ग्रहों से दृष्ट युक्त होना या तो सूर्य और चंद्र अपनी स्वराशि या तो उच्च राशि में होना अति आवश्यक है।

महाभाग्य योग एक राजयोग है जो दूसरे राज योगो से विशेष योग है इस योग में जन्म लेने वाले जातक पर ईश्वर की असीम कृपा होती है।

महाभाग्य योग वाला जातक असाधारण प्रतिभा का स्वामी होता है।

महाभाग्य योग वाला जातक अपनी भाग्य से अपनी कुल,परिवार और समाज का नाम रोशन करता है।

महाभाग्य योग वाला जातक जीवन के हर एक क्षेत्र में सफलता को चुमता है।

महाभाग्य योग के जातक को आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।

महा भाग्य योग वाला जातक सरकार में शक्तिशाली पद, प्रभुत्व, प्रसिद्धि ,लोकप्रियता और शुभ फलों की प्राप्ति करता है।

स्त्री की कुंडली में महाभाग्य योग स्त्री जातक को चरित्रवान बनाता है।

महाभाग्य योग वाली स्त्री जातक राजकीय कार्य में काम करने का अवसर प्राप्त करती है।

जिस स्त्री की कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण होगा वह स्त्री जाति का सुशील और सभ्य होती है ऐसी स्त्री जीवन में परम सुखों और सौभाग्य की प्राप्ति करती है।

महा भाग्य योग का फल कब प्राप्त नहीं होगा।

जातक की कुंडली में अगर महाभाग्य योग का निर्माण हो रहा हो फिर भी कुंडली की ग्रहों की स्थिति और उनकी शुभता के आधार पर महाभाग्य योग का फल जातक को प्राप्त होता है।

जातक की कुंडली में सूर्य और चंद्र शुभ होना अति आवश्यक है।

सूर्य और चंद्र पाप ग्रहों से दृष्ट युक्त होंगे तो जातक महाभाग्य योग का फल प्राप्त नहीं होगा या तो उसमें कमी आए।

जातक की कुंडली में सूर्य और चंद्र अपनी नीच राशि में होगे या तो सूर्य और चंद्र पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि होगी तो भी जातक महाभाग्य योग का फल प्राप्त नहीं होगा।

जातक की कुंडली में सूर्य और चंद्र की स्थिति महाभाग्य योग के फल को प्रदान करने में महत्व की भूमिका अदा करती है।

पुरुष जातक की कुंडली में विषम राशि का लगन हो और सूर्य भी विषम राशि में स्थित हो तो उस जातक को महाभाग्य योग का फल अवश्य ही प्राप्त होगा ऐसा मानना उचित नहीं है।अगर जातक की कुंडली में सूर्य मेष राशि में स्थित होगा तो वह अपनी उच्च राशि में स्थित होने के कारण जातक को महाभाग्य योग का शुभ फल प्राप्त होगा लेकिन वहीं पर सूर्य अगर तुला राशि में स्थित होगा तो तुला राशि सूर्य की नीच राशि होने के कारण जातक को महाभाग्य योग का अच्छा परिणाम प्राप्त नहीं होगा। इस तरह से तुला और मेष दोनों राशियों विषम है और उन दोनों राशि में स्थित सूर्य अलग-अलग परिणाम देता है।

इसी तरह से स्त्री की कुंडली में सम लगन हो और चंद्रमा सम राशि में स्थित हो फिर भी समान परिणाम प्राप्त नहीं होता। स्त्री की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति महाभाग्य योग का निर्माण करने में अति महत्व की है।

वृषभ राशि चंद्रमा की कुछ की राशि है जबकि वृश्चिक राशि चंद्रमा की नीच राशि है। वृषभ राशि एवं वृश्चिक राशि दोनों सम राशिया है।

अगर स्त्री जातिका की कुंडली में चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित होगा तो और महाभाग्य योग का निर्माण हो रहा होगा तो स्त्री जातक को महाभाग्य योग का अति शुभ परिणाम प्राप्त होगा क्योंकि चंद्रमा अपनी उच्च राशि में स्थित होकर महा भाग्य योग का शुभ परिणाम देंगे।

स्त्री जातिका की कुंडली में चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित हो और कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण हो रहा हो तो भी जातक को महाभाग्य योग का परिणाम शुभ प्राप्त नहीं होगा क्योंकि चंद्रमा अपनी नीच राशि में स्थित होने के कारण महाभाग्य योग का शुभ परिणाम स्त्री जाति का को प्राप्त नहीं होगा।

इस तरह से देखा जाए तो जन्म लग्न कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण होने के बावजूद अगर जन्म लग्न पर और कुंडली में स्थित सूर्य एवं चंद्रमा पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि होगी दोनों ग्रह अशुभ स्थिति में होंगे या तो अशुभ भाव में स्थित होंगे तो भी जातक को उसका शुभ परिणाम प्राप्त नहीं होगा।

महा भाग्य योग का शुभ परिणाम प्राप्त करने के उपाय।

जातक की कुंडली में महाभाग्य योग का निर्माण हुआ हो और फिर भी जातक को उसका पूर्ण शुभ फल प्राप्त ना हो तो जातक को निम्न अनुसार उपाय करने से अवश्य ही महाभाग्य योग का शुभ परिणाम प्राप्त होगा।

नित्य प्रात काल निंद्रा को त्याग कर स्नानादि कार्य कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पण करें। पानी में कुमकुम अक्षत डालकर सूर्य देव को जल अर्पण करने से अवश्य ही लाभ प्राप्त होगा।

नित्य माता लक्ष्मी के समक्ष बैठकर श्री सुक्तम का पाठ करें। माता लक्ष्मी को मिठाई का भोग धरावे एवं माता लक्ष्मी की आरती कर उनसे अपने कल्याण हेतु आशीर्वाद प्राप्त करें।


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