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व्यवसाय का ज्योतिष संंबंध Astrology Relationship of Business


Neeraj Goel
(@neeraj-goel)
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करीयर- आज के युग में ज्योतिष के माध्यम में सबसे कठिन क्षेत्र हैं व्यवसाय का चुनाव करना। फिर भी एक कुशल ज्योतिष, वैदिक ज्योतिष के कुछ सामान्य नियम के माध्यम से जातक के सांसारिक जुड़ाव और व्यवसाय करने की भुमिका को आंका जा सकता हैं, जिसमें बहुत सफलता भी मिलती हैं। कार्य क्षेत्र देखने के लिए हम ग्रहों व भावों के प्रभाव से ज्योतिष के नियमों का आकलन करते हैं।

भाव: आजीविका के लिए द्वितीय (धन), तृतीय भाव (पराक्रम), छठा भाव (मेहनत), सांतवा भाव (दशम से दशम यानि व्यवसाय), एकादश भाव (आय) और कर्म स्थान यानि दशम भाव से ही कार्य के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहिए। कुंड़ली में दशम/दशमेश और दशमेश नवांश में जिस राशि में गया हैं, उस की दशा में और ग्रहों से जुड़ा आय का स्रोत्र बनता हैं। (वैदिक ज्योतिष में यदि लग्न, द्वितीय भाव तथा एकादश भावों में शुभ ग्रह हो तो व्यक्ति अनेक स्रोत्रों से आय कमाता हैं।) अपनें व्यवसाय के बारें में जानें!

ऐसा आवशयक नहीं कि हम व्यवसाय के पूरक भाव दशम से ही व्यवसाय की दिशा का आकलन करते हैं, बल्कि इससे जातक के स्वाद व शैली का पता चलता हैं। इस विषय पर ध्यान देना आवशयक हैं। जैसे- 8वें भाव में 10वें भाव का स्वामी हैं और वृश्चिक राशि भी बलवान हैं तो जातक इसी भाव से जुड़ा कार्य पसंद करेगा। यानि कुंड़ली में मज़बूत भावों और ग्रहों के माध्यम से भी व्यवसाय का निर्णय ले सकते हैं।

ग्रहों: ग्रहों में बुध जो हमें व्यवसाय की बुद्धि देता हैं और शनि जो मेहनत करवा कर कर्मशीलता की ओर प्रेरित करता हैं, इन ग्रहों का अध्ययन आवशयक हैं। व्यवसाय का कारक बुध वक्री हो तो जातक के बातचीत का ढंग अभद्र और विद्वेषपूर्ण होता हैं, यही बुध ग्रह शनि के साथ हो तो जातक को बेइज्जती का सामना करना पड़ता हैं। ऐसा जातक दूसरों को ही गलत समझता हैं। यही बुध चंद्रमा के प्रभाव में हो तो जातक कुण्ठाग्रस्त होकर बहुत गलत निर्णय लेता हैं। सूर्य और चंद्रमा प्रकाशमय ग्रह हैं, इनसे भी हमें व्यवसाय को देखना चाहिए।

लग्न कुंड़ली, नवांश कुंड़ली और दश्मांश कुंड़ली का अध्ययन कार्य की रुप-रेखा के लिए आवशयक हैं।

महत्वपूर्ण दशायें और गोचर के बिना हम व्यवसायिक सफलता के बारे में नहीं बता पाते। बिना ग्रहों व राशियों के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते इसलिए चुनाव के लिए कौनसा भाव ग्रह सबसे मज़बूत हैं. इनका आकलन करना होगा।

ग्रहों द्वारा व्यवसाय का चुनाव: यहां हम देखेंगे कि कुंड़ली में कौनसा ग्रह सबसे मज़बूत है उसी के अनुसार कार्य का चुनाव करेंगे।

सूर्य- सूर्य से जातक सत्ता, राजनीति, वैज्ञानिक, नेता, चिकित्सक प्रभुत्व अर्थात राज्य उच्चाधिकारी, प्रतिष्ठित व्यक्ति, सरकारी कार्य, जौहरी, फाइनैंसर, केमिस्ट, ड्रगिस्ट, गवर्नर, प्रधान/सेनाध्यक्ष और प्रबंधक आदि कार्य में रुचि लेता हैं।

सूर्य मिथुन राशि में मंगल के साथ हो तो जातक कम्पयुटर से जुड़ा कार्य करता हैं या सूचना संचार और तकनीकी ज्ञान को हासिल करता हैं।

मंगल और गुरु के प्रभाव से ड़ाक्टरी, वैध, कृषि, खाद्यान्न, अग्नि, सरकारी कर्मचारी, टेलीविजन, सिनेमा, संगीत एवं मठधीश व लकड़ी आदि से भी सम्बन्धित कार्य करते हैं।

चंद्रमा- जातक यात्रा तथा यात्रा से संबंधित सभी कार्य, नाविक, नर्स, आयात-निर्यात, परिचायिका, शराब विक्रेता, कपड़ों की धुलाई, माली, हलवाई, गृह-व्यवस्था, गोशाला के स्वामी, प्रसूति विशेषज्ञ, पौधों का संरक्षण, जड़ी-बूटी/औषोधियों का कार्य, खान-पान का प्रबंधक, भोजनालय, मछली से सम्बन्धित और जल से जुड़े कार्य आदि में रुचि लेता हैं।

चंद्रमा छठे भाव का स्वामी हो कर हीलिंग राशि कन्या में हो जो अष्टम भाव में आयेगी, इससे जातक स्वास्थय के क्षेत्र से जुड़ा होगा और दूसरों से हट कर एक विशेष प्रकार की चिकित्सा में रुचि लेता हैं।

मंगल- जातक अग्नि सम्बन्धित कार्यों, युद्ध, अग्नि शमन, धातु का कार्य, आयुध/अस्त्र-शस्त्र के कारखानें, मशीनें, औजार, सैनिक, पुलिस, शल्यचिकित्सक, दांतो का ड़ाक्टर, मसालें, नाई, रसोइया, लोहे आदि का सामान, लोहार, कसाई, दवा विक्रेता, औषधि-निर्माण, बक्से बनाने, इंजिनियर आदि कार्य में रुचि लेता हैं।

बुध- किसी कार्य के लिए अभिलेख तैयार करना, पढ़ना/लिखना, क्लर्क, अकाउंटेंट, हिसाब-किताब रखने वाले, ड़ाक-संचार, ट्रेन-बस, संचार माध्यम, व्यवसाय, वास्तुशिल्पी, संवाददाता, स्टेनोग्राफर, दुभाषिए, संदेशवाहक, रिपोर्टर, रेड़ियों, स्टेशनरी, छपाई, प्रकाशान, टेलीफ़ोन, ऑप्रेटर, क्लर्क, एड़िटर व ज्योतिष से जुड़ा कार्य करना पसंद करता हैं।

गुरु- जातक परामर्श दाता, वकील, प्रवक्ता, शिक्षक, शिक्षाविद, प्रकाशक, ज्योतिषी, ट्रेवल-एजेंट, पुजारी व मंदिरो के ट्रस्टी तथा संचालक, केशियर, दार्शनिक, साहित्य, मर्मज्ञ, पंसारी, तम्बाकू का कारोबार, फाईनेंस, स्कोलर्स, साईकलोजिस्ट और मानवता के कार्य में रुचि लेता हैं।

शुक्र- जातक कवि, कलाकार, नर्तक, गायक, संगीतज्ञ वादक, कपड़े, टोपियों के व्यवसायी, सिल्क, अन्य महंगे कपड़े, सुगंध, इत्र, रूप-सज्जा बढ़ाने के सामान, ब्यूटीशियन, विदूषक, घर की साज सज्जा, फर्नीचर, चाय/काफी, तड़क-भड़क वाले सामान, स्त्रियों के लिए प्रसाधन सामग्री, कला और फैशन से जुड़े सामान,फोटोग्राफ्री, कार्टून बनाने वाले, फूलों के व्यवसायी, बेल-बूटे काढ़ने वाले, होटल व मनोरंज़न के कार्य में रुचि लेता हैं।

शनि- जातक सुरंग खोदने वाले, कोयला या अन्य प्रकार के ईंधन के कारोबारी, जमीन की खरीद-बिक्री, शिल्पी, वास्तुकार, कब्र खोदने, ताबूत तथा समाधि/मकबरा बनाने वाले, भवनों के ठेकेदार, चमड़े/हड्डियों के कारोबारी, घड़ीसाज, आइसक्रीम बनाने वाले, फ़ार्म-फैक्ट्री में काम करने वाले, श्रमिक, पहरेदार, अंतेयेष्टि प्रबंधक, पुजारी, साध्वी, साधू, दार्शनिक कार्य, रियल-एस्टेट और खनिज़ पदार्थों का कार्य करता हैं।

राहु- जातक आकाश विमान चालक, रेड़ियो, टीवी, बेतार टेलीफोन, बिजली, विष, औषधि, एयर-होस्टेस, कूटनीति प्रबंधन, यात्रा आदि के आयोजक, शोधकर्त्ता, फिजिशियन, शेयर-मार्किट, वेस्ट सामान और सॉफ्टवेयर के कार्य करता हैं।

केतु- जातक गोपनीय कार्य, मुशिकल कार्य, परा-विधा, विदेशी-भाषा, कम्प्यूटर, इंजिनियर, सॉफ्टवेयर, लैंगवेज़, शोध-कार्य, आश्रमों में सेवा करने वाले, धार्मिक कार्य, जासुस और जहरीले पदार्थ से जुड़े कार्य करता हैं।

राशियों द्वारा व्यवसाय का चुनाव:-

मेष- ऐसा काम जहां मेहनत, साहस और ऊर्जा की आवश्यकता हो। जातक सैनिक, पुलिस, वैज्ञानिक, इंजीनियर, दांतों का डॉक्टर, सर्जन, कर्मचारी, अनवेषी, उधोगपति, मजदूर संघ का नेता, कानून विभाग में अधिकारी या मैकेनिक बन सकता हैं। ऐसा जातक ब्रेन सर्ज़री करने वाला भी होता हैं। जातक पत्रकार या वकालत के कार्य में भी रुचि लेता हैं। ऐसा कार्य जिसमें किसी उद्देश्य के लिए झण्डा उठाना हो वह बखुबी निभाता हैं।

वृषभ- ऐसे जातक व्यवहारिक और दृढ़ प्रतिज्ञत होते हैं। जातक बैंकर, कैशियर, फाईनैंसर, सौंदर्य प्रसाधन, गहने, फैशन, प्रचार, विज्ञापन, गायक, गला विशेषज्ञ हो सकता हैं। शुक्र व चंद्रमा बली हो तो जातक संगीतकार, ध्वनि अथवा श्रवण विशेषज्ञ हो सकता हैं। ऐसे जातक को कृषि की अच्छी जानकारी होती हैं।

मिथुन- इन लोगों की संचार माध्यम में अधिक रुचि होती हैं। ये लोग भाषाविद, दुभाषिया, अनुवादक, विक्रेता, लेखक, अनुसंधानकर्त्ता, ऑड़िटर, अकाउण्टेंट, गणितज्ञ, संपादक, संवाददाता, इंजीनियर, कानुन और शिक्षा के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। ऐसे लोग अच्छे व्यापारी भी होते हैं। जहां विवेचना व व्याख्या की जरुरत पड़े वहां ये लोग बहुत सफल होते हैं। बुध शुभ होने पर जातक कथावाचक/लेखन, कविता लेखन और गुरु का साथ मिले तो गम्भीर इतिहास लेखन तथा जीवनी में अपनी पहचान बनाते हैं।

कर्क- ऐसा जातक जीव विज्ञान, ड़ेयरी, शहद का कार्य, घर की सफाई से जुड़ा कार्य या सामान, बच्चों की संरक्षिका, होटलों के मैंनेजर, सुह्र्दय नर्से, सौम्य स्वभाव के डॉक्टर, नाविक, कपड़ों की धुलाई से जुड़े कार्य में रुचि लेते हैं। अगर शुक्र व मंगल का प्रभाव हो तो जातक, होटल, अल्पाहार, मिठाईयां, आईसक्रीम, बेकरी आदि में सफलता पाता हैं। कर्क राशि पीड़ित हो तो जातक शराब या शराब की भट्टी जैसे कार्य करता हैं। यही अगर शनि या गुरु का प्रभाव हो तो इतिहास, पुरातत्व विभाग, संग्रहालय या शिक्षण के कार्य से जुड़ेगा।

सिन्ह- यह एक आदर्श राजकीय राशि हैं। बली सिंह राशि का प्रभाव लग्न/दशम भाव पर हो तो जातक प्रशासन, प्रभुत्व, संस्था/विभाग का प्रमुख, सरकारी प्रशासन का कार्य, संचालक के कार्य में अपनी पहचान बनाते हैं। ऐसा जातक स्टाक एक्चेंज, पैसो का लेनदेन, पुंजी निवेश व्यवसाय, गहनों का कार्य, सिनेमा नाटक, चिकित्सा, दवाईयां तथा रसायनों के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। सूर्य व मंगल बली हो तो राजनेता, कार्यकर्ता और शुक्र का प्रभाव हो तो विदेशी सेवा और राजदूत बनते हैं जिनमें संयम, प्रखरता, विनय, और दृढ़्ता जैसे गुण होते हैं।

कन्या- ये लोग छोटी-छोटी बातों पर बहुत ध्यान देते हैं अत: ये अच्छे शिक्षक विक्रेता, बस चालक, क्लर्क, रिसेप्शनिष्ट, सचिव, ड़ाक विभाग का कार्य, स्टेनिग्राफर, दुभाषियें, अनुवादक, पुस्तकाध्यक्ष, रेड़ियो, टेलिविज़न के उद्दघोषक, कागज का व्यवसाय, हस्त लेखन, नोटरी का कार्य, कम्पयुटर, लेखक, सम्पादक, संवाददाता, मनोचिकित्सक, खोजी व जासुस होते हैं। जहां बुद्धि तथा कार्य कुशलता की आवशयकता हो तो ये लोग अपनी पहचान बनाते हैं। बुध शुभ होने पर जातक कैशियर, बैंको के क्लर्क और प्रोफेसर होते हैं। शनि के प्रभाव से टाईपिस्ट, संग्राहालय के कर्मचारी, तथा हिसाब-किताब रखने वाले होते हैं। सूर्य का प्रभाव होने से आड़िटर्स, टैक्स के अधिकारी या चार्टेड़ एकाउंटेंट बनते हैं। शुक्र का प्रभाव हो तो सेल्स गर्ल/मैन, क्लर्क या पुस्काध्यक्ष होते हैं।

तुला- इस राशि का चिन्ह संतुलन हैं जिससे जातक जज, वकील, न्यायाधिकारी, तार्किक, कानुनाधिकारी, प्रबंधक, या जनसम्पर्क अधिकारी होता हैं। इसका स्वामी शुक्र होने पर जातक का रुख गायक, कलाकार, सौंदर्य विशेषज्ञ, केश सज्जा, फैशन मॉड़ल, फर्नीचर, सुगंध का कार्य, समाज सेवी, फोटोग्राफर, चाय/कॉफी, चटपटे व्यंजन, होटल, रेस्टोरेंट आदि के कार्य करते हैं। राहु व चंद्रमा का प्रभाव हो तो शिल्पकार, कलाकार और सिनेमा के अभिनेता बनते हैं। शनि का प्रभाव हो तो जातक कार्टून बनाने वाला, कैमरा मैन, दर्जी, ड्रेस ड़िजाईनर, मेकअपमैन का कार्य करता हैं।

वृश्चिक- यह राशि रहस्यमय राशि हैं। इसके प्रभाव से जातक रहस्यमयी दुनिया का वासी, चिंतक, ज्योतिषी, पराविधा, में रुचि रखते हैं। ये लोग बातों को गोपनीय रखने में माहिर होते हैं अत: जासूस, चतुर/शातिरता में माहिर होते हैं। ऐसे लोग नर्स, केमिस्ट, ड़ाक्टर, सेना-पुलिस, नाविक, जीवन बीमा के एजेंट तथा इनके व्यवसायी होते हैं। मंगल बली होतो जातक रेल, पुलिस/सेना, गार्डस, टेलीफोन आदि विभागों के कर्मचारी होते हैं। चंद्रमा बली होतो गोताखोर, समुद्री भोजन, विष, दवाईयां तथा रसायन का काम करने वाले होते हैं।

धनु- यह राशि निर्भीक और व्यवाहारिक होती हैं सबसे मज़बूत राशि यही हैं। खेलकूद, घुड़सवार, उपदेशक, कानुन, धर्म से जुड़ाव, स्वतंत्रता सैनानी, वकील, प्रबंधक, फाईनेंसर, जुआरी, चमड़े का व्यापारी, आयात-निर्यात, शिक्षक, धर्म-प्रचारक, सलाहकार और प्रोफेसर होता हैं। शनि और गुरु का प्रभाव हो तो जातक वकालत, जज तथा न्यायधीश व दार्शनिक होता हैं।

मकर- यह राशि जातक को कर्मठ और योग्य बनाती हैं। ऐसा जातक खेती, खदान, बागवानी, खनिज विज्ञान, भुगर्भ शास्त्र, आयोजक तथा सचिव होते हैं। किसी भी कार्य को शुरु से अंत तक करने की क्षमता हैं। जिस कार्य में छानबीन की आवशयकता होती हैं ये लोग वह काम बखुबी निभाते हैं जैसे राजनैयिक व उच्च पद का अधिकारी। शनि बलि हो तो जातक बैंकर, व्यापारी व खेती के काम में होते हैं।

कुम्भ- यह राशि सलाहकार की होती हैं चाहे तकनीकी हो कानूनी हो सामाजिक हो या किसी भी सलाहकार की जरुरत हो तो इस राशि वाले सदा उचित सलाह लेकर तैयार रहते हैं। इनके पास नवीनतम विचार/प्रखर बुद्धि होती हैं। ये बिजली विभाग, नाभकिय ऊर्जा, कम्पयुटर, टेकनॉलजी, आविष्कारक, ज्योतिषी, टेलीपैथी, सम्मोहन, एक्सरे और ड़ाक्टरी सामान के व्यापारी होते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा और चिंतक में भी सफलता मिलती हैं।

मीन- ऐसे लोग ड़ाक्टर, नर्स, संत, सर्जन, जेलर और जेल के कार्य में सफल होते हैं। इनमें गजब की कल्पना शक्ति होती हैं। ये सिनेमा, पटकथा लिखना, धुने बनाना, नृत्य कला, कोरियोग्राफी, समाज सेवा, अनाथाश्रम के कार्यकर्ता, म्युजियम, पुस्तकालय के कार्य में रुचि रखते हैं। ये लोग कवि, संगीतकार, पराविधा, ट्रैवल एजेंट, पेट्रोल/तेल विक्रेता, समुद्र से निकली वस्तुयो के व्यापारी, मनोरंजन केंद्रो के स्वामी, तट रक्षक, गैरसरकारी जासूस और आत्माओ से सम्पर्क बनाने वाले होते हैं। शुक्र के प्रभाव से सुंदर चित्रकारी तथा अच्छे अभिनेता भी इसी राशि में पाये जाते हैं।

दसवें भाव में मेष, सिंह और धनु- अग्नि राशियां जो शल्य चिकित्सा, अग्नि, ताप तथा तकनीकी क्षेत्रों और इंजीनियर जैसे व्यवसायों को दिखाती हैं।

वृष, कन्या या मकर- पृथ्वी राशियां जो पाण्डित्य, बौद्धिक, लेखक, कलाकार, लेखा जोखा, वकील, प्रबंधन या सलाहकार जैसे कार्य में होते हैं।

मिथुन, तुला या कुम्भ-वायु तत्व राशियां से जातक मानसिक/बौद्धिक कार्य करने वाले और चिंतक, वैज्ञानिक, सलाहकार, शिक्षक, पायलट, वकील तथा ज्योतिषी होते हैं।

कर्क, वृश्चिक या मीन- जलीय राशियां जो तरल पदार्थ, नौसेना, कर्मचारी, मछुआरे, औषध-विक्रेता, तैराक, चालक, पैट्रोलियम उत्पादों के जुड़ा कार्य बताते हैं।

चर राशि- यदि जातक की कुंड़ली में चार या अधिक ग्रह चर राशियों में हो तो जातक एक जगह टिक कर कार्य नहीं कर पाता हैं। वह घूमने का शौकीन होता हैं और उसको यश, प्रतिष्ठा और धन की लालसा होती हैं। ये शीघ्र निर्णय लेते हैं और शीघ्र ही परिस्थितियों के अनुरुप खुद को ढ़ाल लेते हैं। ये लोग खुले विचारों के और बदलाव में रुचि रखते हैं। इनका मन प्रतिपल बदलता रहता हैं, जिससे इन पर विशवास नहीं किया जा सकता हैं। ये लोग सैल्समैन, बाजार के सलाहकार और प्रबंधक होते हैं।

स्थिर राशि- यदि चार या चार अधिक ग्रह एक ही राशि में हो तो जातक स्थित प्रवृति के होते हैं और आत्म शोभित, धनी, ज्ञानी, प्रख्यात और सम्मानित होते हैं। ये अधिकतर एक ही स्थान में रहना और टिक कर काम करना पसंद करते हैं। ये अचल सम्पत्ति के स्वामी होते हैं, जिससे इनका सम्पर्क क्षेत्र बड़ा होता हैं और बदलाव इनको पसंद नहीं आता हैं। शोध कार्य में इनकी अधिक रुचि होती हैं।

द्विस्वभाव राशि- द्विस्वभाव में चार से अधिक ग्रह हो तो जातक चिंतक होता हैं और अपने निकट के लोगों से अधिक स्नेह रखने वाला तथा बुद्धिमान होता हैं। इनके विचार बार-बार बदलते रहते हैं जिससे ये लोग बहुत बार हाथ आया हुआ अवसर खो देते हैं। जिससे इनकी आर्थिक अवस्था में उतार-चढ़ाव देखे गये हैं। जिससे ये लोग शीघ्र हताश और निराशावादी बन जाते हैं।

भावों द्वारा व्यवसाय का चुनाव:-

प्रथम भाव: दशम भाव का स्वामी प्रथम भाव में आना- अपने मेहनत के बल से ऐसे जातक जीवन में उन्नति करते हैं। जातक अपना ही स्वतंत्र व्यवसाय करते हैं। यदि दशमेश के साथ लग्नेश भी लग्न में हो तो जातक अपने चुने हुए क्षेत्र में अत्यंत सफलता व प्रतिष्ठता पाता हैं। ऐसा जातक सामाजिक संस्थाओं की स्थापना करता हैं तथा स्वयं को समाज सेवा में समर्पित कर देता हैं। लग्नेश दशम भाव में हो तो जातक को अपने व्यवसाय कार्य में सफलता मिलती हैं। ऐसे जातक को बड़े-बड़े लोगों से सम्मान मिलता हैं। ऐसा जातक शोधकार्य भी कर सकता हैं अथवा अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में सम्मान पाता हैं। जातक राजनैतिक तथा अन्य प्रकार के प्रतिष्ठित पदों की प्राप्ति होने के अतिरिक्त बड़े लोगो के बीच उसकी पहचान होती हैं। दशमेश नवांश में जहां बैठे हो यदि उस राशि के स्वामी अशुभ हो तो जातक की ख्याति को काफी धक्का पहुँचता हैं तथा अपयश मिलता हैं तथा वह भी पापकृत्य करने लगता हैं।

द्वितीय भाव: दशमेश का द्वितीय भाव में होना जातक को भाग्यशाली बनाता हैं। वह जीवन में उन्नति पाता हैं किन्तु यदि दशम भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो ऐसा जातक धन का नाश करता हैं तथा नुकसान के कारण पैतृक व्यवसाय बंद कर देता हैं। जातक भोजन बनाने व खिलाने का व्यवसाय उसे बहुत अच्छी तरह आते हैं जिनमें वह उन्नति करता हैं। अगर द्वितीयेश दशम भाव में हो तो जातक नाना प्रकार के उद्धम करता हैं। वह व्यवसाय के साथ खेती बाड़ी व दार्शनिक व्याख्यानों में भी व्यस्त रहता हैं। दशम भाव या दशमेश पर दुष्ट प्रभाव हो तो लाभ की बजाये हानि ही होगी, उन्ही स्त्रोतों से भी जहां से लाभ की अपेक्षा होती हैं। जातक बैंकिग, इनवेस्टमेंट, अकाउण्टेंट, खाने पीने का कार्य, सलाहकार और साईकलोजिस्ट होता हैं।

तृतीय भाव: जातक को अपने व्यवसाय के कारण लगातार यात्राओं के लिए निकलना पड़ता हैं। यदि दशमेश शुभ ग्रहो के प्रभाव में हो तब तो जातक अच्छा वक्ता तथा समाज में प्रतिष्ठित होगा एवं उसे अपने जीवन में आगे बढ़ने में उसके भाई सहायता करते हैं। जन्म कुंड़ली में तृतीय भाव में यदि नवांश कुंड़ली के लग्न से ६, ८ या १२ राशि हो तथा उसमें दशमेश बैठे हो अथवा दशमेश जिस नक्षत्र में हैं उसका स्वामी दशमेश का शत्रु हो तो जातक को जीवन में बाधा मिलती हैं। यदि तृतीयश भी पीड़ित हो तो भाइयों में अनबन, वैमनस्य आदि बहुधा देखे जाते हैं जिससे जातक का व्यवसायिक जीवन अथवा उसकी आजीविका का स्त्रोत धीरे-धीरे पिछड़ने लगता हैं। अगर तृतीयेश दशम भाव में हो तो जातक को यात्राओं से व्यवसाय/आजीविका में सहायता मिलती हैं। ऐसा जातक कम्पयुटर, लिखाई, प्रकाशन, सेल्स, कला और संचार से जुड़ा कार्य करता हैं|


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